गुरु जी से आशीर्वाद लेकर बंदा सिंह बहादुर दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़े। रास्ते में राजपूताना और हरियाणा के क्षेत्रों से गुजरते हुए उन्होंने स्थानीय लोगों को संगठित किया। उनका लक्ष्य स्पष्ट था – अत्याचारी मुगल शासकों और उनके सामंतों को सबक सिखाना।
बादशाह ने नामक सबसे बड़े सेनापति को 30,000 सैनिकों के साथ बंदा सिंह को खत्म करने भेजा। लेकिन बंदा सिंह ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति से मुगल सेना को जंगलों और पहाड़ियों में भटका दिया। Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST
नमस्कार दोस्तों, पिछले भाग में हमने देखा कि कैसे एक साधु माधो दास ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से दीक्षा लेकर ‘बंदा सिंह बहादुर’ बने और उन्हें पंजाब भेजा गया। गुरु जी के आशीर्वाद और ‘जयते’ (विजय) की ध्वनि के साथ वह निकले। अब इस भाग में जानते हैं कि कैसे इस साधु-सेनानी ने मुगल सल्तनत की नींव हिला दी। Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST
सरहिंद (Sirhind) मुगलों का सबसे शक्तिशाली किला था। यहीं पर गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादे ज़ोरावर सिंह और फतेह सिंह को जिंदा दीवार में चिनवाया गया था। गवर्नर वजीर खान खून का प्यासा था। Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST
जब बादशाह बहादुर शाह को दक्षिण (राजस्थान) से सरहिंद की हार और बंदा सिंह के बढ़ते प्रभाव के समाचार मिले, तो उन्होंने सारी उपेक्षा छोड़ दी। यह कोई साधारण विद्रोह नहीं था, बल्कि एक क्रांति थी।
यह पीछे हटना पराजय नहीं था, बल्कि एक नई रणनीति का हिस्सा था।
सबसे पहला झटका समाना (Samana) को लगा, जो मुगल जासूसी और प्रशासन का गढ़ था। यह वही समाना था जहाँ के कुछ लोगों ने गुरु तेग बहादुर जी को धोखा दिया था।